यह वही दिन है जब “सोने की चिड़िया” अंग्रेजी दासता से आज़ाद हुई थी । वह सोने की चिड़िया जिसे हम भारत कहते हैं ।
एक प्रश्न है जो बार-बार आता है मेरे मन में । क्या भारत कभी “सोने की चिड़िया” था ?
अगर हाँ तो आज घायल है “सोने की चिड़िया” । और केवल घायल ही नहीं बल्कि फिर एक दासता के बंधन मे भी है । और यह कहना गलत न होगा कि यह दासता अंग्रेजी दासता से भी अधिक गहरी है । इसकी जड़ें बहुत व्यापक हैं । केवल कैदखाना बदल गया है। और कुछ नहीं बदला है । आज भी आज़ादी का सपना उतना ही धुंधला है । और दासता में बांधने वाली जंजीरें और भी जटिल हैं । और इस दासता के पिंजरे में पंख फैलाने तक की आज़ादी नहीं है उसे ................ ।
डर इस बात का है कि कहीं यह “सोने की चिड़िया” पंख फैलाना ही ना भूल जाये। बहुत संभावना है ऐसा होने की । और यह संभावना बेहद खतरनाक है । चिंता की बात यह है कि किसी का ध्यान इस तरफ क्यों नहीं जाता । और यह गुलामी शारीरिक तल की नहीं है । बल्कि मानसिक तल तक इसकी जड़ें फैली हुई हैं । और सत्य तो यह है कि “सोने कि चिड़िया ” स्वयं इस गुलामी की जिम्मेदार है।
ये जंजीरें भी उसकी स्वयं की हैं । कोई भी और इसका जिम्मेदार नहीं । 15 अगस्त 1947 वो दिन था जब एक कैद से आज़ाद हुई थी “सोने की चिड़िया”। पंख का विस्तार कर उड़ना था उसे । लेकिन अपनी ही हीनता ने उसे स्वतंत्र नहीं होने दिया । और आज तक भी आज़ादी नसीब नहीं हुई उसे । “संकीर्णताओं में स्वयं को सिकोड़ लेना ही परतंत्रता है”। और वही हुआ भी ।
“सोने की चिड़िया” की उड़ान का तात्पर्य भारत के विकास की संभावनाओं से है । हर व्यक्ति इसकी अभिव्यक्ति है । गणित की भाषा में कहें तो “सोने की चिड़िया” व्यक्ति का ही integration है ।
इस प्रकार यह “सोने की चिड़िया” कोई अतिशय सम्बोधन नहीं बल्कि चेतना की ही अभिव्यक्ति है ।
मुक्त आकाश में उड़ना ही उसकी प्रकृति है । उसे अपनी गरिमा में प्रतिष्ठित होना ही होगा । उसे उड़ना ही होगा ।उसे आगे बढ़ना ही होगा ....................... ।





4 प्रतिक्रियाएँ:
सुन्दर अभिव्यक्ति के साथ भावपूर्ण प्रस्तुती!
आपको एवं आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
आपको भी सपरिवार आज़ादी की हार्दिक शुभकामनायें!
स्वतंत्रता दिवस की बधाई....
बहुत बढिया लेख
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