जो आदमी अपने अहंकार को मिटाने को राज़ी है
वही केवल प्रेम को उपलब्ध हो सकता है ।
और हम केवल अपने अहंकार को भरने के लिए
जीवन भर लगे रहते हैं ।
बहुत-बहुत रूपों में अहंकार को भरने की चेष्टा करते हैं ।
धन से भी , यश से भी ,पद से भी , ज्ञान से भी ,
और यहाँ तक कि त्याग से भी हम अहंकार को ही भरने कि कोशिश करते हैं ।
जीवन की सारी दिशाओं से हम एक ही काम करते हैं
कि मैं अपने मैं को मजबूत कर लें ।
और मैं से बड़ा कोई झूठ नहीं है । मैं एकदम असत्य बात है ।
लहर का कोई अस्तित्व नहीं है ,अस्तित्व तो सागर का है ।
पत्ते का कोई अस्तित्व नहीं है , अस्तित्व तो वृक्ष का है ।
और वृक्ष का भी कोई अस्तित्व नहीं है ,
अस्तित्व तो पृथ्वी का है । पृथ्वी का भी क्या अस्तित्व है
चाँद-तारों और सूरज के बिना ?
असल में अस्तित्व समग्र का है ,टोटल का है ।
अस्तित्व खंड-खंड का नहीं ।
- ओशो





0 प्रतिक्रियाएँ:
एक टिप्पणी भेजें